Wednesday, May 2, 2018

Central Government Expand Its Reach Of Minority Development Scheme To 308 Districts - सरकार ने बढ़ाया अल्पसंख्यक विकास का दायरा, अब 196 नहीं 308 जिलों को मिलेगा फायदा

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 03 May 2018 10:20 AM IST



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भाजपा शासित केंद्र सरकार ने अल्पसंख्यक कल्याण की योजना का दायरा बढ़ाकर 198 से बढ़ाकर अब इसे 308 जिलों में लागू करने जा रही है। इस योजना के तहत अल्पसंख्यकों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास के लिए सामाजिक-आर्थिक बुनियादी ढांचे में सुधार लाया जाएगा। पिछले साल इस योजना के अंतर्गत 27 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के लिए 3,972 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं जिन्हें कि तीन सालों में खर्च किया जाना था। अब इसे 32 जिलों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा।

जिन राज्यों के ज्यादा से ज्यादा जिलों को इस योजना के अंतर्गत फायदा होगा उनमें उत्तर प्रदेश के 43, महाराष्ट्र के 27, कर्नाटक, बंगाल और राजस्थान के 16, गुजरात, अरुणाचल प्रदेश और केरल के 13, तमिलनाडु के 12, मध्य प्रदेश के 8, हरियाणा और मणिपुर के 7 और पंजाब के 2 जिले शामिल हैं। इस कार्यक्रम के तहत अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में स्कूल, छात्रावास आदि का निर्माण करने के साथ ही दूसरे विकास योजनाओं को चलाया जाएगा। 

प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम योजना (पीएमजेवीके) के तहत 33 फीसदी से 40 फीसदी संसाधन खासतौर से महिला केंद्रित परियोजनाओं के लिए आवंटित किए जाएंगे। इस मामले पर अल्पसंख्यक मंत्रालय का कहना है कि पीएमजेवीके के तहत 80 फीसदी संसाधनों को शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास से संबंधित परियोजनाओं के लिए निर्धारित किया जाएगा। मंत्रालय के अनुसार यह कार्यक्रम पिछड़ापन के मापदंड पर राष्ट्रीय औसत और अल्पसंख्यक समुदायों के बीच की खाई को पाटने की एक कोशिश है। 

बहु-क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम को साल 2008 में लॉन्च किया गया था जिसका अब इसका नाम बदलकर पीएमजेवीके रख दिया गया है। अब यह पांच और राज्यों के साथ ही केंद्र शासित प्रदेश को कवर करेगा। जिनमें हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु, नगालैंड, गोवा और पुड्डुचेरी शामिल हैं। इसके अलावा अल्पसंख्यक बहुल सबसे पिछड़े 61 महत्वकांक्षी जिलों को भी इस योजना के दायरे में लाया गया है।



भाजपा शासित केंद्र सरकार ने अल्पसंख्यक कल्याण की योजना का दायरा बढ़ाकर 198 से बढ़ाकर अब इसे 308 जिलों में लागू करने जा रही है। इस योजना के तहत अल्पसंख्यकों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास के लिए सामाजिक-आर्थिक बुनियादी ढांचे में सुधार लाया जाएगा। पिछले साल इस योजना के अंतर्गत 27 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के लिए 3,972 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं जिन्हें कि तीन सालों में खर्च किया जाना था। अब इसे 32 जिलों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा।


जिन राज्यों के ज्यादा से ज्यादा जिलों को इस योजना के अंतर्गत फायदा होगा उनमें उत्तर प्रदेश के 43, महाराष्ट्र के 27, कर्नाटक, बंगाल और राजस्थान के 16, गुजरात, अरुणाचल प्रदेश और केरल के 13, तमिलनाडु के 12, मध्य प्रदेश के 8, हरियाणा और मणिपुर के 7 और पंजाब के 2 जिले शामिल हैं। इस कार्यक्रम के तहत अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में स्कूल, छात्रावास आदि का निर्माण करने के साथ ही दूसरे विकास योजनाओं को चलाया जाएगा। 

प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम योजना (पीएमजेवीके) के तहत 33 फीसदी से 40 फीसदी संसाधन खासतौर से महिला केंद्रित परियोजनाओं के लिए आवंटित किए जाएंगे। इस मामले पर अल्पसंख्यक मंत्रालय का कहना है कि पीएमजेवीके के तहत 80 फीसदी संसाधनों को शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास से संबंधित परियोजनाओं के लिए निर्धारित किया जाएगा। मंत्रालय के अनुसार यह कार्यक्रम पिछड़ापन के मापदंड पर राष्ट्रीय औसत और अल्पसंख्यक समुदायों के बीच की खाई को पाटने की एक कोशिश है। 

बहु-क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम को साल 2008 में लॉन्च किया गया था जिसका अब इसका नाम बदलकर पीएमजेवीके रख दिया गया है। अब यह पांच और राज्यों के साथ ही केंद्र शासित प्रदेश को कवर करेगा। जिनमें हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु, नगालैंड, गोवा और पुड्डुचेरी शामिल हैं। इसके अलावा अल्पसंख्यक बहुल सबसे पिछड़े 61 महत्वकांक्षी जिलों को भी इस योजना के दायरे में लाया गया है।





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